अन्यउत्तर प्रदेशधर्म-आस्थाबड़ी खबरमथुराराज्यराष्ट्रीय

जब भगवान शिव नशा कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं? जानिए प्रेमानंद महाराज ने क्या उत्तर दिया

प्रवचन के दौरान एक भक्त ने जब विवादित सवाल पूछ लिया — “जब भगवान शिव नशा कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं?” — तब प्रेमानंद महाराज ने बहुत ही संतुलित, वैदिक दृष्टिकोण से इसका उत्तर दिया। उनका जवाब न सिर्फ तार्किक था, बल्कि आज की युवा पीढ़ी को एक सही दिशा देने वाला भी रहा।

❓ सवाल क्या था?

एक युवक ने प्रेमानंद महाराज जी से कहा:

शिव  तो भांग, धतूरा और गांजा लेते हैं, नशा करते हैं। तो फिर हम क्यों नहीं कर सकते?”

📿 प्रेमानंद महाराज का उत्तर:

प्रेमानंद महाराज ने मुस्कुराते हुए शांत भाव से उत्तर दिया:

शिव कोई सामान्य प्राणी नहीं हैं। वे संहारकर्ता हैं, योगियों के अधिपति हैं। वे जब विष पीते हैं, तो वह ‘हलाहल’ होता है — जो समुद्र मंथन से निकला और सृष्टि की रक्षा के लिए उन्होंने स्वयं अपने कंठ में धारण किया। क्या कोई मनुष्य हलाहल पी सकता है?

उन्होंने आगे स्पष्ट किया:

शिव का “नशा” सांसारिक नहीं, आध्यात्मिक स्थिति है।वे ध्यान, योग और आत्म-संयम की अवस्था में रहते हैं।शिव की तरह व्यवहार करने के लिए, पहले वैसी आत्म-शुद्धि और त्याग लाना होगा।

🚫 नशा नहीं, भक्ति अपनाओ

प्रेमानंद महाराज ने युवाओं को नसीहत दी कि:

नशा आत्मा को नहीं, शरीर और बुद्धि को मारता है।शिव की भक्ति का मार्ग नशा नहीं, बल्कि जप, ध्यान, और सेवा है।अगर तुम शिव को मानते हो, तो उनके त्याग और संयम का अनुसरण करो, न कि प्रतीकात्मक कर्मों का।

📌 निष्कर्ष

भगवान शिव का नशा दिव्यता का प्रतीक है, नहीं कि व्यसन का औचित्य।प्रेमानंद महाराज का उत्तर यही बताता है कि धर्म को अर्थपूर्ण संदर्भ में समझना जरूरी है, न कि मनमानी व्याख्या के आधार पर।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button