
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में चलती बस के अंदर 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली और गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्तों तथा मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी है।
रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा 4 अगस्त की रात ग्रेटर नोएडा के परी चौक से एक बस में सवार हुई थी। आरोप है कि बस के चालक और परिचालक ने उसके साथ अपराध किया। बाद में छात्रा को दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में छोड़ दिया गया। मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
जांच में पुलिस ने बस से फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज भी हासिल की है, जिसमें छात्रा के बस में सवार होने और बाद में कश्मीरी गेट क्षेत्र में उतरने से संबंधित फुटेज शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मामले में मजबूत आरोपपत्र तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
मामले के बाद बसों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने कदम उठाए हैं। दिल्ली सरकार ने बसों में पैनिक बटन और वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस को हर समय चालू रखने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा बसों में पर्दे और खिड़कियों पर ऐसे फिल्म या कवर लगाने पर रोक लगाई गई है, जिससे अंदर की दृश्यता प्रभावित होती है।
बस चालकों और परिचालकों के लिए भी सुरक्षा संबंधी नियमों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया है। सरकार ने ड्राइवरों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस और निर्धारित यूनिफॉर्म होने की बात कही है। बस संचालकों को चालक, परिचालक और अन्य कर्मचारियों को महिलाओं की सुरक्षा तथा यात्रियों के साथ किसी भी तरह के दुर्व्यवहार के गंभीर परिणामों के बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में सामने आए आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ा है। आयोग ने संबंधित पुलिस अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें जांच की स्थिति और पीड़िता को दिए गए किसी मुआवजे की जानकारी भी शामिल होगी।
इस घटना के बाद दिल्ली-एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की ओर से बसों में निगरानी व्यवस्था, आपातकालीन सहायता प्रणाली और कर्मचारियों की जवाबदेही को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
मामले की पुलिस जांच जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच प्रशासन द्वारा बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जारी किए गए नए निर्देशों को यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Poonam Report



