बिहार

महिला यूनिवर्सिटी की स्थापना, 1 करोड़ महिलाओं को रोजगार, CM सम्राट चौधरी का रक्षाबंधन पर बड़ा तोहफा; कई बड़े ऐलान

राज्य में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर अगले तीन वर्षों में 1 करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही जीविका दीदियों के लिए आर्थिक सहायता, महिला उद्यमिता, स्वास्थ्य और छात्राओं के लिए प्रोत्साहन राशि से जुड़ी कई घोषणाएं की गई हैं।

बिहार में बनेगा महिला विश्वविद्यालय

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रक्षाबंधन के मौके पर बिहार में महिला विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा की है। इस विश्वविद्यालय की खास बात यह होगी कि यहां छात्राओं के साथ-साथ शिक्षक, स्टाफ और कुलपति भी महिलाएं होंगी।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना तथा उन्हें उच्च शिक्षा और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है।

तीन साल में 1 करोड़ महिलाओं को रोजगार

मुख्यमंत्री ने बिहार की महिलाओं के लिए रोजगार को लेकर बड़ा लक्ष्य भी रखा है। सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में 1 करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ना है।

सरकार का कहना है कि महिला आर्थिक रूप से मजबूत होगी तो परिवार और राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। इसी उद्देश्य से स्वयं सहायता समूहों, जीविका और महिला उद्यमिता से जुड़ी गतिविधियों को विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है।

5 लाख जीविका दीदियों के खाते में 600 करोड़ रुपये

रक्षाबंधन के अवसर पर सरकार ने 5 लाख जीविका दीदियों के खातों में कुल 600 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इनमें 4 लाख महिलाओं को पहली किस्त और 1 लाख महिलाओं को दूसरी किस्त दी गई।

इसके अलावा जीविका निधि के माध्यम से 10 हजार महिलाओं को 50 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराने की भी जानकारी सामने आई है।

10 लाख जीविका दीदियों का बिजली बिल होगा जीरो

महिलाओं से जुड़े एक अन्य बड़े ऐलान में सरकार ने कहा है कि 10 लाख जीविका दीदियों के घरों का बिजली बिल शून्य किया जाएगा। यह पहल महिला परिवारों के घरेलू खर्च को कम करने और उन्हें आर्थिक राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही छात्राओं के लिए भी घोषणा की है। प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाली छात्राओं को 30 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को आगे की तैयारी में मदद करना है।

SC-ST महिलाओं को अंतरजातीय विवाह पर आर्थिक सहायता

सरकार ने SC-ST समुदाय की महिलाओं के लिए भी बड़ी घोषणा की है। अंतरजातीय विवाह करने वाली पात्र महिलाओं को 2.5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देने की योजना की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य सामाजिक समरसता और महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा देना बताया गया है।

सुधा सखी बनने पर भी आर्थिक मदद

महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए सुधा सखी मॉडल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सुधा ब्रांड के डेयरी बिक्री केंद्र खोलने वाली महिलाओं को 60 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर आय के नए अवसर पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

4700 महिलाओं को दोपहिया वाहन देने की योजना

महिलाओं को रोजगार और आजीविका से जोड़ने के लिए सरकार की ओर से 4700 दोपहिया वाहन उपलब्ध कराने से जुड़ी घोषणा भी सामने आई है। इसका उद्देश्य महिलाओं की आवाजाही आसान करना और उन्हें रोजगार के अवसरों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है।

‘अनीमिया मुक्त बिहार’ अभियान भी शुरू

महिला सशक्तिकरण के साथ स्वास्थ्य पर भी सरकार ने जोर दिया है। ‘अनीमिया मुक्त बिहार’ विशेष अभियान की शुरुआत की गई है, जो 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चलाया जाएगा।

इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया की समस्या को कम करना और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

मिथिला हस्तकला को भी मिलेगा बढ़ावा

महिलाओं को पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जोड़ने के लिए मिथिला हस्तकला को-ऑपरेटिव सोसायटी की घोषणा भी की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पद्मश्री दुलारी देवी को इसका अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि पद्मश्री शांति देवी और पद्मश्री शिवम पासवान को सह-अध्यक्ष तथा रानी झा को सदस्य बनाया गया है।

महिला सशक्तिकरण पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बिहार के विकास का रास्ता महिलाओं की प्रगति से होकर गुजरता है। सरकार का जोर महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाने के बजाय उन्हें रोजगार, स्वरोजगार, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने पर है।

रक्षाबंधन से पहले की गई इन घोषणाओं को बिहार की महिलाओं के लिए सरकार की बड़ी पहल के तौर पर देखा जा रहा है। अब इन योजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषणाओं को जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

नोट: 1 करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य सरकार की घोषित योजना/लक्ष्य है; इसे तत्काल 1 करोड़ नौकरियां उपलब्ध होने के रूप में नहीं समझना चाहिए। इसी तरह महिला विश्वविद्यालय की घोषणा के बाद इसके स्थान, स्थापना की समयसीमा और विस्तृत नियमों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा।

चंदा रिपोर्ट

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