सुना है क्या: चमचागिरी की काबिलियत से खेल रहे ठेके का खेल… और साहबों पर गिरेगी गाज तो माननीय का हुआ मोहभंग
सत्ता और सिस्टम के गलियारों में इन दिनों एक चर्चा तेज़ है। कहा जा रहा है कि ठेके का खेल अब योग्यता से नहीं, बल्कि चमचागिरी की काबिलियत से खेला जा रहा है। जो जितना ज्यादा “जी-हुजूरी” में माहिर, वही उतना बड़ा खिलाड़ी बनता जा रहा है। नियम-कानून, अनुभव और पारदर्शिता सब पीछे छूटते दिख रहे हैं।
कैसे चल रहा है ठेके का खेल?
सूत्रों की मानें तो कुछ चुनिंदा लोग—
साहबों की हर बात में हां में हां मिलाते हैं
फैसलों से पहले ही मन मुताबिक माहौल बना देते हैं
फाइलें उन्हीं की मेज तक पहुंचती हैं, जो “खास” माने जाते हैं
नतीजा यह कि ठेके उन्हीं के नाम हो रहे हैं, जिनकी पहचान काम से कम और पहुंच से ज्यादा है।
साहबों पर गिरेगी गाज?
अब खबर यह भी है कि ऊपर तक शिकायतें पहुंच चुकी हैं। यदि जांच हुई और साहबों पर गाज गिरी, तो तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। यही वजह है कि अंदरखाने हलचल तेज है और कई चेहरे चिंता में डूबे हुए हैं।
माननीय का मोहभंग!
चर्चा यह भी है कि जिन माननीय के संरक्षण में यह पूरा खेल फल-फूल रहा था, अब वही माननीय धीरे-धीरे दूरी बना रहे हैं। कारण साफ है—
> “जब मामला उजागर होगा, तो सियासी नुकसान क्यों उठाया जाए?”
यही मोहभंग अब कई ‘खास’ लोगों के लिए खतरे की घंटी बन गया है।
सवाल सिस्टम पर
इस पूरे खेल ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या सिस्टम में ईमानदारी की कोई जगह बची है?
क्या मेहनत और योग्यता सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?
और क्या हर बार गाज छोटे लोगों पर ही गिरेगी?
फिलहाल सब कुछ “सुना है” के दायरे में है, लेकिन अगर ये चर्चाएं सच साबित हुईं, तो ठेके के इस खेल में कई बड़े नाम बेनकाब हो सकते हैं। अब देखना यह है कि कार्रवाई होती है या मामला फिर फाइलों में ही दबा दिया जाता है।
Poonam report



