UP: बुखार के बाद 43 लोग हुए दिव्यांग, 14 माह से 22 साल तक के मरीज — परिवारों ने रस्सी से बांधा, 11 गांव बीमारी की चपेट में

उत्तर प्रदेश के एक इलाके से सामने आई यह खबर बेहद चिंताजनक है, जहां तेज बुखार के बाद 43 लोग दिव्यांग हो गए। हैरानी की बात यह है कि प्रभावित लोगों की उम्र सिर्फ 14 महीने से लेकर 22 साल के बीच बताई जा रही है। बीमारी का असर इतना गंभीर है कि कई परिवारों को मजबूरी में अपने बच्चों और युवाओं को रस्सी से बांधकर रखने का कदम उठाना पड़ा है, ताकि वे खुद को या दूसरों को नुकसान न पहुंचा सकें।
11 गांव बीमारी की चपेट में
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक यह रहस्यमयी बीमारी कम से कम 11 गांवों में फैल चुकी है। शुरुआत में मरीजों को तेज बुखार आता है, जिसके कुछ समय बाद शारीरिक कमजोरी, चलने-फिरने में दिक्कत और स्थायी दिव्यांगता जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे और युवा हैं।
परिवारों की मजबूरी, हालात बेहद दर्दनाक
बीमारी से प्रभावित कई लोग मानसिक और शारीरिक रूप से खुद पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं। ऐसे में परिजनों का कहना है कि इलाज और संसाधनों की कमी के कारण उन्हें अपने ही बच्चों को रस्सी से बांधकर रखना पड़ रहा है।
परिवारों का कहना है कि यह कदम वे शौक से नहीं, बल्कि मजबूरी में उठा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि:
समय पर डॉक्टर और मेडिकल टीमें नहीं पहुंचीं
बीमारी की सही जांच और पहचान अब तक नहीं हो पाई
गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर करने में देरी हुई
हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मेडिकल टीमों को गांवों में भेजा गया है और मरीजों की जांच की जा रही है।
बीमारी की वजह अब भी साफ नहीं
डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि यह बीमारी किस वायरस या संक्रमण के कारण फैल रही है। कुछ मामलों में न्यूरोलॉजिकल असर की आशंका जताई जा रही है, लेकिन पुष्टि के लिए सैंपल जांच जारी है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों और परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि:
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तुरंत भेजी जाए
प्रभावित लोगों का मुफ्त और बेहतर इलाज कराया जाए
बीमारी के कारणों की जल्द पहचान कर रोकथाम की जाए
यह मामला सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भयावह हो सकते हैं।
Poonam report



