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अंतरराष्ट्रीय बाजार में बयान: “रूस से तेल खरीदना बंद किया तो अमेरिका का ही घाटा, भारत का कुछ नहीं जाएगा” — जानिए क्यों अहम है ये बयान

वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में हलचल मचा देने वाला बयान सामने आया है। अमेरिका के कुछ रणनीतिक हलकों में भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर बार-बार दबाव डाला जाता रहा है,

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बयान: “रूस से तेल खरीदना बंद किया तो अमेरिका का ही घाटा, भारत का कुछ नहीं जाएगा” — जानिए क्यों अहम है ये बयान

📍नई दिल्ली | 2 अगस्त 2025 — वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में हलचल मचा देने वाला बयान सामने आया है। अमेरिका के कुछ रणनीतिक हलकों में भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर बार-बार दबाव डाला जाता रहा है, लेकिन भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं।

एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने साफ कहा है—

> “अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे तो नुकसान भारत का नहीं, अमेरिका का ज्यादा होगा। भारत अपने हितों को ध्यान में रखकर ही कदम उठाएगा।”

🇮🇳 भारत का रुख स्पष्ट:

भारत ने यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से रियायती दरों पर तेल खरीद को बरकरार रखा। पश्चिमी देशों ने भले ही इस पर आपत्ति जताई हो, लेकिन भारत ने हमेशा कहा कि वह अपने ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई नियंत्रण के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।

🛢️ भारत को फायदा क्या हुआ?

रूस से रियायती तेल की खरीद से भारत ने तेल आयात बिल में कटौती की

महंगाई पर काबू पाने में मदद मिली

डीज़ल-पेट्रोल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहीं

तेल को रिफाइन कर अन्य देशों को एक्सपोर्ट कर भारत को आर्थिक लाभ हुआ

🇺🇸 अमेरिका का असंतुलन क्यों?

भारत रूस से सस्ता तेल खरीद कर अमेरिका समेत पश्चिमी बाजारों में परिष्कृत उत्पादों के रूप में बेचता है

इससे अमेरिकी रिफाइनरियों पर दबाव पड़ता है

अमेरिका की खुद की ऊर्जा कूटनीति कमजोर होती दिखती है

भारत को लेकर बने नैरेटिव कमजोर होते हैं

🔍 विशेषज्ञों की राय:

आर्थिक विश्लेषक मानते हैं कि भारत का रुख संतुलित और रणनीतिक है। एक ओर वह अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे देशों से रणनीतिक साझेदारी बनाए रखता है, वहीं रूस से ऊर्जा जैसे जरूरी क्षेत्र में व्यापारिक संबंध भी निभा रहा है।

🗣️ भारत ने पहले भी दिया था करारा जवाब:

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहले भी पश्चिमी देशों को स्पष्ट कहा था—

> “आप चाहें तो यूरोप का आंकड़ा देखें, भारत से कहीं ज्यादा रूस से तेल खरीद वही कर रहे हैं।”

📊 तेल व्यापार के आंकड़े (2023–2025):

देश रूस से तेल खरीद (मिलियन बैरल)

भारत 142
चीन 195
यूरोप (सामूहिक) 160+

निष्कर्ष:

भारत अपने ऊर्जा हितों से समझौता नहीं करेगा। रूस से तेल खरीद कर उसने आर्थिक मोर्चे पर मजबूती हासिल की है। अगर किसी को घाटा है, तो वह अमेरिका और पश्चिमी शक्तियों की छवि और आर्थिक वर्चस्व को है — भारत को नहीं।

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