पाकिस्तान और अफगानिस्तान युद्धविराम पर सहमत: दोहा बैठक के बाद कतर का बड़ा ऐलान, क्या तालिबान भरोसा करेगा जनरल मुनीर पर?

कई महीनों से चले आ रहे तनाव और सीमा झड़पों के बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने आखिरकार युद्धविराम पर सहमति जता दी है। यह अहम फैसला दोहा (कतर) में हुई एक गुप्त उच्च-स्तरीय बैठक के बाद सामने आया है। कतर के विदेश मंत्रालय ने रविवार को इसकी औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि दोनों देशों ने “स्थायी शांति के लिए संवाद की नई प्रक्रिया” शुरू करने का वादा किया है।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में पाकिस्तान की ओर से जनरल आसिम मुनीर ने प्रतिनिधित्व किया, जबकि अफगानिस्तान की ओर से तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी मौजूद थे। इस दौरान दोनों पक्षों ने सीमा पर लगातार हो रहे तिराह और स्पिन बोल्डक क्षेत्र में संघर्ष विराम और खुफिया सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।
हालांकि, अफगान सूत्रों ने दावा किया है कि तालिबान नेतृत्व अभी भी पाकिस्तान पर पूरी तरह भरोसा करने को तैयार नहीं है। टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) को लेकर पाकिस्तान की नीति पर अफगान पक्ष को गहरा संदेह है। तालिबान का कहना है कि “जब तक पाकिस्तान अपने गुप्त अभियानों को बंद नहीं करता, तब तक वास्तविक शांति संभव नहीं।”
कतर ने इस समझौते की मध्यस्थता में अहम भूमिका निभाई और अब वह दोनों देशों के बीच निगरानी समिति गठित करने जा रहा है जो युद्धविराम की स्थिति पर नज़र रखेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है — क्या तालिबान धोखेबाज मुनीर (जैसा कि काबुल मीडिया उन्हें कहता है) पर सच में भरोसा करेगा?
अगर यह युद्धविराम टिकता है, तो क्षेत्र में आतंकवाद, शरणार्थी संकट और सीमाई तनाव पर नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।



