15 दिन तक चलेगा कुष्ठ जागरूकता अभियान, 3.43 लाख घरों तक पहुंचेगी टीम

इंदौर जिले में कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 15 दिवसीय कुष्ठ जागरूकता अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें 3.43 लाख से अधिक घरों तक पहुंचेंगी और लोगों को कुष्ठ रोग से जुड़ी जरूरी जानकारी देंगी।
अभियान का उद्देश्य क्या है
इस विशेष अभियान का मुख्य लक्ष्य है—
कुष्ठ रोग के छिपे हुए मामलों की पहचान
लोगों में फैली भ्रम और गलत धारणाओं को दूर करना
रोग के लक्षणों की समय पर पहचान कर इलाज शुरू कराना
समाज में कुष्ठ रोग से जुड़े भेदभाव को खत्म करना
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, समय पर जांच और उपचार से कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
घर-घर जाकर होगी जांच
अभियान के दौरान—
प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी घर-घर सर्वे करेंगे
त्वचा पर सुन्नता, सफेद या लाल धब्बों जैसे लक्षणों की जांच की जाएगी
संदिग्ध मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाएगा
जरूरत पड़ने पर निःशुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी
इस दौरान विशेष ध्यान झुग्गी बस्तियों, ग्रामीण इलाकों और संवेदनशील क्षेत्रों पर दिया जाएगा।
3.43 लाख घरों तक पहुंचेगी टीम
स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर में टीमों का गठन किया है, जो—
शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को कवर करेंगी
प्रतिदिन तय लक्ष्य के अनुसार घरों का सर्वे करेंगी
अभियान की प्रगति की रोजाना समीक्षा की जाएगी
अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर अभियान चलाने का मकसद है कि कोई भी परिवार जागरूकता से वंचित न रह जाए।
लोगों को दी जाएगी यह जानकारी
अभियान के दौरान लोगों को बताया जाएगा कि—
कुष्ठ रोग छूने से नहीं फैलता
यह पूरी तरह इलाज योग्य बीमारी है
समय पर दवा लेने से रोगी सामान्य जीवन जी सकता है
इलाज मुफ्त और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है
इसके साथ ही रोगियों और उनके परिवारों को मानसिक सहयोग भी दिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि—
स्वास्थ्यकर्मियों का पूरा सहयोग करें
किसी भी संदिग्ध लक्षण को छिपाएं नहीं
समाज में कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव न करें
अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता और सहयोग से ही जिले को कुष्ठ मुक्त बनाया जा सकता है।
इंदौर में शुरू हो रहा यह 15 दिवसीय कुष्ठ जागरूकता अभियान स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक चेतना की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 3.43 लाख घरों तक पहुंचने वाली यह पहल न सिर्फ बीमारी की पहचान में मदद करेगी, बल्कि समाज में फैले डर और भ्रांतियों को भी दूर करेगी।
Poonam Report



