आगरा नगर निगम के निर्माण कार्यों पर सवाल, 42 फीसदी तक कम दर पर टेंडर के बाद भी गुणवत्ता जांच में सब ठीक

आगरा नगर निगम के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम में कई निर्माण कार्य अनुमानित लागत से काफी कम दर पर ठेकेदारों को दिए जा रहे हैं। कुछ मामलों में टेंडर अनुमानित कीमत से 42 फीसदी तक कम दर पर उठाए गए, लेकिन इसके बावजूद थर्ड पार्टी जांच में निर्माण कार्यों में कोई कमी नहीं बताई गई। दूसरी ओर, मौके पर कुछ सड़कों, फुटपाथ और डिवाइडर के जल्द खराब होने की शिकायतें सामने आई हैं।
मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पार्षदों ने निर्माण कार्यों और उनकी गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया पर ही सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब किसी काम का टेंडर अनुमानित लागत से 25 से 45 फीसदी तक कम दर पर लिया जा रहा है, तो निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता बनाए रखने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसके बावजूद थर्ड पार्टी जांच में लगातार कार्यों को बेहतर बताया जा रहा है।
लोहामंडी से बोदला के बीच करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से डिवाइडर, सड़क, साइड पटरी, फुटपाथ और पुलिया का निर्माण कराया गया। रिपोर्ट के अनुसार इस काम में सड़क के कुछ हिस्सों में धंसने की शिकायत सामने आई, फुटपाथ ऊबड़-खाबड़ होने और कर्व स्टोन टूटने की बात भी कही गई। इसके बावजूद नगर निगम की थर्ड पार्टी जांच में इन कार्यों को बेहतर पाया गया।
नगर निगम के अलग-अलग क्षेत्रों में कई अन्य काम भी अनुमानित लागत से काफी कम दर पर दिए गए। शांति सिनेमा के पास सीसी फर्श का टेंडर 42 फीसदी कम दर पर लिया गया। ताजगंज जोन में कमला अरुण स्कूल के सामने ताल सैमरी तक सीसी नाला निर्माण का टेंडर 37 फीसदी कम दर पर आया। अमरबाग और अतुल फार्म हाउस के पास नाला निर्माण के टेंडर भी 38 फीसदी कम दर पर लिए गए।
गुणवत्ता जांच की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। पहले नगर निगम 40 लाख रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की थर्ड पार्टी जांच कराता था, लेकिन बाद में इसकी सीमा घटाकर 10 लाख रुपये कर दी गई। अब 10 लाख रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की जांच बीएलजी कंसल्टेंट के माध्यम से कराई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने एक साल में किसी भी निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी कमी नहीं बताई, जबकि इसी अवधि में कुछ सड़कों के धंसने, नालों की दीवार गिरने, सीवर लाइन क्षतिग्रस्त होने और फुटपाथ टूटने जैसी शिकायतें सामने आईं।
पार्षद रवि माथुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि निर्माण सामग्री और अन्य लागत बढ़ने के बावजूद नगर निगम में कई काम काफी कम कीमत पर कराए जा रहे हैं। उन्होंने थर्ड पार्टी जांच को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। पार्षद बंटी माहौर ने भी कहा कि कई सड़कें बनने के तीन से छह महीने के भीतर खराब हो रही हैं, जबकि कागजों में गुणवत्ता जांच में कोई कमी नहीं मिलती। ये आरोप पार्षदों के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नगर निगम के मुख्य अभियंता अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि ठेकेदार कितनी कम कीमत पर टेंडर लेता है, इस पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने बताया कि ठेकेदारों पर 150 फीसदी परफॉर्मेंस गारंटी लगाई गई है और पीडब्ल्यूडी के मानकों के अनुसार निर्माण कार्यों की सख्ती से जांच कराई जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर थर्ड पार्टी जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं तो इसकी भी जांच कराई जा सकती है।
अब सवाल यह है कि कम दर पर दिए गए निर्माण कार्यों में वास्तविक लागत, इस्तेमाल की गई सामग्री और गुणवत्ता मानकों की निगरानी कितनी प्रभावी है। यदि किसी सड़क, फुटपाथ या नाले में निर्माण के कुछ ही महीनों बाद खराबी सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करने और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जरूरत होगी।
Poonam Report



