श्रीमद्भागवत पाठ में भक्ति और सदाचार का संदेश, भगवान के नाम को बताया जीवन का सबसे बड़ा सहारा

गोरखपुर। गृहस्थ संत भाईजी श्री हनुमान प्रसाद और उनके नित्य सहचर श्री राधा बाबा की तपोभूमि गीतावाटिका में चल रहे श्रीमद्भागवत पाठ के तीसरे दिन भक्ति, वैराग्य और सदाचार से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया गया। आचार्य योगेन्द्र मिश्र के मार्गदर्शन में 132 विद्वान पुरोहितों ने श्रीमद्भागवत के पांचवें स्कंध के नौवें अध्याय से सातवें स्कंध के 15वें अध्याय तक श्लोकात्मक पाठ किया। यह धार्मिक अनुष्ठान भाईजी के 134वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में 30 सितंबर से शुरू हुआ है और छह अक्टूबर तक चलेगा।
श्रीमद्भागवत पाठ प्रतिदिन दो सत्रों में आयोजित किया जा रहा है। पहला सत्र सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरा सत्र दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक चल रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा अमेरिका, कनाडा, नेपाल और हैदराबाद समेत अन्य स्थानों से श्रद्धालु ऑनलाइन जुड़कर पाठ में सहभागिता कर रहे हैं। श्रद्धालु अपने पितरों की मुक्ति और कल्याण के लिए भी प्रार्थना कर रहे हैं।
शुक्रवार को पाठ के दौरान यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि भगवान का नाम मानव जीवन में सबसे बड़ा सहारा है। भक्त प्रह्लाद के प्रसंग के माध्यम से भगवान के प्रति अटूट विश्वास और निष्ठा का महत्व बताया गया। पाठ में कहा गया कि भक्ति और विश्वास के साथ जीवन जीने से व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
इस दौरान जड़भरत और राजा रहूगण का प्रसंग भी सुनाया गया। जड़भरत के माध्यम से देह और आत्मा के अंतर तथा संसार के प्रति आसक्ति से मुक्त रहने का संदेश दिया गया। कथा के अनुसार, जीवों के प्रति दया भाव के कारण जड़भरत सावधानी से कदम रखते थे। राजा रहूगण के साथ संवाद में उन्होंने देह और आत्मा के वास्तविक स्वरूप को समझाया। इस प्रसंग के माध्यम से मोह, अज्ञान और सांसारिक आसक्ति से ऊपर उठने का संदेश दिया गया।
श्रीमद्भागवत के पांचवें स्कंध में शुकदेव जी द्वारा राजा परीक्षित को ब्रह्मांड की संरचना और उससे जुड़े विभिन्न विषयों का वर्णन भी किया गया। जम्बूद्वीप, सात द्वीप, सुमेरु पर्वत, सूर्य, चंद्रमा तथा ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और उनकी गतियों का आध्यात्मिक एवं दार्शनिक संदर्भ में वर्णन किया गया। इसके साथ ही पाताल लोक और अनंत देव शेषनाग के ऐश्वर्य से जुड़े प्रसंग भी पाठ में शामिल रहे।
पांचवें स्कंध के अंतिम अध्यायों में कर्मों के आधार पर विभिन्न नरक लोकों का वर्णन करते हुए लोगों को पापकर्मों से बचने और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई। आयोजन में भक्ति, वैराग्य, सदाचार और आध्यात्मिक चिंतन से जुड़े संदेशों को जीवन में अपनाने पर जोर दिया गया।
Poonam Report.



