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CM सम्राट चौधरी ने किया ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ का शुभारंभ, 30 दिन के भीतर होगा छात्रों की समस्याओं का निराकरण

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार, 25 अगस्त को वैशाली जिले के बिदुपुर स्थित बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ का शुभारंभ किया। यह पहल ‘सात निश्चय-3’ के तहत ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की समस्याओं और शिकायतों का समयबद्ध तरीके से समाधान करना है।

छात्रों की समस्याएं सीधे सुनेगी सरकार

‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ के जरिए छात्र अपनी समस्याएं सीधे संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकेंगे। शिविर में विद्यार्थियों से जुड़ी शैक्षणिक व्यवस्था, परीक्षा, छात्रावास, पेयजल, शौचालय, कैंटीन और अन्य सुविधाओं से संबंधित शिकायतों और सुझावों पर सुनवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, बिदुपुर में छात्र-छात्राओं से संवाद भी किया और उनकी समस्याओं, शिकायतों तथा सुझावों को सुना। अधिकारियों को इन समस्याओं के समयबद्ध समाधान के निर्देश दिए गए हैं।

30 दिनों के भीतर शिकायतों का समाधान

सरकार ने विद्यार्थियों की शिकायतों के निपटारे के लिए अधिकतम 30 दिनों की समय सीमा तय की है। यानी पोर्टल या शिविर के माध्यम से दर्ज शिकायतों पर संबंधित विभागों को निर्धारित अवधि के भीतर कार्रवाई करनी होगी। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।

खास बात यह है कि शिकायत दर्ज कराने वाले विद्यार्थियों की पहचान को गोपनीय रखने की व्यवस्था भी की गई है। इससे छात्र बिना किसी झिझक के अपनी समस्या प्रशासन के सामने रख सकेंगे।

हर महीने आयोजित होगा विद्यार्थी सहयोग शिविर

सरकार की योजना के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों में हर महीने के चौथे मंगलवार को ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से छात्रों की समस्याओं की पहचान कर उन्हें संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और समाधान की प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी।

इस अभियान को केवल कॉलेजों तक सीमित नहीं रखा गया है। राज्य के स्कूलों और छात्रावासों में भी विद्यार्थियों की समस्याओं को सामने लाने और उनके समाधान की प्रक्रिया शुरू की गई है।

ऑनलाइन भी दर्ज करा सकेंगे शिकायत

छात्रों को शिकायत दर्ज कराने के लिए ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके जरिए विद्यार्थी अपनी समस्या या सुझाव ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं और शिकायत के निस्तारण की स्थिति की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

इसके अलावा छात्रावास और विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याओं के लिए 1100 हेल्पलाइन नंबर की सुविधा भी दी गई है। सरकार का उद्देश्य छात्रों को अपनी समस्या बताने के लिए एक सीधा और आसान माध्यम उपलब्ध कराना है।

10 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो क्या होगा?

सरकार ने शिकायतों के समाधान को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यदि शिकायत दर्ज होने के बाद 10 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू नहीं होती, तो 11वें दिन मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से स्वतः नोटिस जारी किए जाने की व्यवस्था है। इसके बाद अधिकतम 30 दिनों के भीतर शिकायत का समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने पर जोर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इससे पहले 17 अगस्त को ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ का शुभारंभ किया था। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करने के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।

अब ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ के जरिए इस व्यवस्था को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इससे विद्यार्थियों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित होने की उम्मीद है।

छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

कॉलेज, विश्वविद्यालय और छात्रावासों में छात्रों को अक्सर परीक्षा, पढ़ाई, छात्रावास, भोजन, पानी, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में शिकायत के समाधान में देरी होने पर छात्रों को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ती है।

‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सरकार ने ऐसी शिकायतों के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया और समय सीमा तय करने की कोशिश की है। अब इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित विभाग शिकायतों पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से कार्रवाई करते हैं।

सरकार और छात्रों के बीच बनेगा सीधा संवाद

‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ के जरिए सरकार की कोशिश है कि छात्रों की समस्याएं सीधे प्रशासन तक पहुंचें और उनका समाधान भी तय समय के भीतर हो। हर महीने होने वाले शिविर, ऑनलाइन पोर्टल और 1100 हेल्पलाइन के माध्यम से विद्यार्थियों को शिकायत दर्ज कराने के कई विकल्प मिलेंगे।

सरकार का कहना है कि यह पहल बिहार की शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुगम, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

चंदा रिपोर्ट

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