
बक्सर/पटना। बिहार के सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालय इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। विद्यालयों को बिजली, रखरखाव और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए मिलने वाली राशि इतनी कम है कि पूरे वर्ष विद्यालय का संचालन करना मुश्किल हो गया है। कई स्कूलों को प्रति छात्र मात्र लगभग डेढ़ रुपये वार्षिक के हिसाब से अनुदान मिलने की शिकायत है, जिससे बिजली के पंखे चलाना तक चुनौती बन गया है।
विद्यालय प्रबंधनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और भवनों के रखरखाव के खर्च के बीच उपलब्ध राशि नाकाफी साबित हो रही है। गर्मी के मौसम में छात्रों को राहत देने के लिए पंखे और अन्य सुविधाएं आवश्यक हैं, लेकिन सीमित बजट के कारण कई स्कूल बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब सरकारी और निजी विद्यालयों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं, तब सहायता प्राप्त विद्यालय संसाधनों की कमी के कारण प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं। इसका सीधा असर नामांकन पर पड़ रहा है। अभिभावक अपने बच्चों को ऐसे विद्यालयों में भेजना पसंद कर रहे हैं जहां बेहतर भवन, स्वच्छ शौचालय, पीने का पानी, कंप्यूटर और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों।
विद्यालय संचालकों ने सरकार से अनुदान राशि बढ़ाने और बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग बजट उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कई सहायता प्राप्त विद्यालयों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि सहायता प्राप्त विद्यालय वर्षों से समाज के गरीब और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा उपलब्ध कराते रहे हैं। ऐसे में इन संस्थानों को मजबूत करना शिक्षा व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
पूनम रिपोर्ट



