इलाहाबाद हाईकोर्ट का दहेज मृत्यु मामले में अहम फैसला: सिर्फ सामान्य आरोप से दोषसिद्धि नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज मृत्यु के एक मामले में स्पष्ट किया कि सिर्फ दहेज मांगने या सामान्य आरोप लगाए जाने से दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। अभियोजन पक्ष को यह ठोस रूप से साबित करना जरूरी है कि महिला के साथ दहेज के संबंध में क्रूरता या उत्पीड़न हुआ और उसका संबंध मृत्यु से जुड़ा था।
कोर्ट ने ऐसे मामलों में विशिष्ट घटनाओं और विश्वसनीय साक्ष्यों के महत्व पर जोर दिया। केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि ससुराल वालों ने दहेज मांगा या महिला को परेशान किया; आरोपों के समर्थन में ऐसा प्रमाण होना चाहिए जिससे कथित उत्पीड़न और मृत्यु के बीच आवश्यक कानूनी संबंध स्थापित हो सके।
इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि दहेज उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई नहीं होगी। बल्कि अदालत ने कहा है कि आपराधिक दोषसिद्धि ठोस और विश्वसनीय सबूतों पर आधारित होनी चाहिए, क्योंकि केवल अनुमान या अस्पष्ट आरोप के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
दहेज मृत्यु से जुड़े मामलों में कानून के तहत विशेष प्रावधान और वैधानिक अनुमान भी लागू होते हैं, इसलिए हर मामले का फैसला उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।
Poonam Report



