नमामि गंगे: 40 साल, हजारों करोड़ और फिर भी मैली रह गई गंगा; CAG ने उठाए कई गंभीर सवाल
भारत में गंगा नदी को स्वच्छ बनाने के प्रयास 1985 में गंगा एक्शन प्लान से शुरू हुए और 2014 में नमामि गंगे मिशन के रूप में इसे नए स्वरूप में आगे बढ़ाया गया। इन दशकों में हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन हालिया नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की समीक्षा में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं।
CAG की प्रमुख टिप्पणियां:
कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) समय पर पूरे नहीं हुए या पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रहे।
कई शहरों में बिना शोधन का सीवेज अब भी सीधे गंगा में गिर रहा है।
परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी, निगरानी की कमी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का अभाव पाया गया।
जल गुणवत्ता की निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपलब्ध आंकड़ों का प्रभावी उपयोग नहीं किया गया।
कई स्थानों पर परियोजनाओं के रखरखाव और संचालन में भी कमियां दर्ज की गईं।
गंगा की सफाई के लिए केंद्र सरकार ने समय-समय पर बड़े बजट आवंटित किए हैं। नमामि गंगे मिशन के तहत सीवेज शोधन, घाटों का विकास, नदी की सतह की सफाई, वनीकरण और जैव विविधता संरक्षण जैसे कई कार्य किए गए हैं, लेकिन प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर पूरी तरह नियंत्रण अभी भी चुनौती बना हुआ है। Poonam report



