पाकिस्तान के ‘इस्लामिक ब्रदरहुड’ प्लान को लगा पलीता
PM मोदी की एक मुलाकात से बिगड़ा मुनीर–शहबाज का गेम

दिल्ली।
दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जिस ‘इस्लामिक ब्रदरहुड’ रणनीति के जरिए मुस्लिम देशों का समर्थन जुटाकर भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरने की कोशिश कर रहे थे, उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अहम कूटनीतिक मुलाकात ने पानी फेर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में PM मोदी ने एक प्रभावशाली मुस्लिम देश के शीर्ष नेतृत्व से सीधी बातचीत कर भारत की आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट नीति और क्षेत्रीय शांति के विज़न को मजबूती से रखा। इस मुलाकात के बाद उस देश का रुख पाकिस्तान से हटकर भारत के पक्ष में झुकता नजर आया है, जिससे इस्लामिक ब्रदरहुड जैसी सोच पर आधारित पाकिस्तान की रणनीति को बड़ा झटका लगा है।
क्या था पाकिस्तान का प्लान?
पाकिस्तान लंबे समय से कुछ इस्लामिक देशों को साथ लेकर एक ऐसा राजनीतिक दबाव समूह बनाना चाहता था, जिससे कश्मीर मुद्दे और भारत के खिलाफ वैश्विक माहौल तैयार किया जा सके। जनरल मुनीर इसे सेना की रणनीतिक जीत मान रहे थे, जबकि शहबाज शरीफ इसे कूटनीतिक सफलता के तौर पर पेश करने की तैयारी में थे।
लेकिन भारत की सक्रिय विदेश नीति और पीएम मोदी की व्यक्तिगत डिप्लोमेसी ने इस पूरे समीकरण को बदल कर रख दिया।
PM मोदी की कूटनीति फिर दिखी असरदार
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद, आर्थिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर बेहद स्पष्ट संदेश देकर यह साबित कर दिया कि भारत भरोसेमंद साझेदार है, जबकि पाकिस्तान अस्थिरता का केंद्र बना हुआ है।
यही वजह है कि जिन देशों से पाकिस्तान समर्थन की उम्मीद कर रहा था, वे अब भारत के साथ रणनीतिक सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं।
पाकिस्तान में मचा हड़कंप
PM मोदी की इस कूटनीतिक चाल के बाद इस्लामाबाद में राजनीतिक और सैन्य हलकों में बेचैनी साफ देखी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सरकार अब अपने ही प्लान की समीक्षा में जुट गई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पा रहा।
भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत
यह घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता है कि भारत अब सिर्फ क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा रहा है। PM मोदी की नेतृत्व क्षमता और मजबूत विदेश नीति ने पाकिस्तान की कई चालों को पहले ही नाकाम किया है, और यह ताजा मामला उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
रिपोर्ट: निरुपमा पाण्डेय
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