पेट की आग बुझाने को खाल और सूखी घास खा रहे लोग, दो साल में ऐसे उजड़ गया ये देश

कभी समृद्ध और खुशहाल रहा यह देश आज भुखमरी और विनाश का पर्याय बन चुका है। पिछले दो सालों में हालात इतने भयावह हो गए हैं कि लोग जानवरों की खाल, सूखी घास और पत्ते खाकर अपनी जान बचाने पर मजबूर हैं। यह स्थिति किसी प्राकृतिक आपदा की नहीं, बल्कि युद्ध, सूखा और राजनीतिक अस्थिरता की देन है जिसने देश की जड़ें हिला दी हैं।
🔹 दो साल में उजड़ गया पूरा देश
साल 2023 में शुरू हुए संघर्ष और उसके बाद लगे आर्थिक प्रतिबंधों ने पूरे देश की रीढ़ तोड़ दी। खेतीबाड़ी पूरी तरह ठप, पशुधन खत्म, और बाजार वीरान हो चुके हैं। अब लोगों के पास खाने को न अनाज है, न काम। इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं—जहां मां अपने बच्चों को मिट्टी और सूखी घास से बनी “रोटी” खिला रही है।
🔹 बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे खराब
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की आधी से ज्यादा आबादी भुखमरी की स्थिति में है। हर तीसरा बच्चा कुपोषण से पीड़ित है। अस्पतालों में दवाएं खत्म हैं, डॉक्टर पलायन कर चुके हैं और कई जगहों पर लोग बीमारी से पहले भूख से मर रहे हैं।
🔹 पानी और भोजन दोनों संकट में
जहां कभी नदियां बहती थीं, वहां अब सूखे गड्ढे हैं। लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलकर गंदा पानी लाना पड़ता है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि जानवरों की खाल, सूखी झाड़ियां और पेड़ों की पत्तियां ही उनका एकमात्र भोजन बन गए हैं।
🔹 मदद पहुंचना हुआ मुश्किल
अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जैसे यूएन और रेड क्रॉस राहत सामग्री भेजने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन युद्ध और अस्थिरता के कारण सहायता जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रही। कई क्षेत्रों में सड़कों और पुलों के नष्ट हो जाने से राहत वितरण लगभग असंभव है।
🔹 नागरिक बोले – “अब बस भगवान ही सहारा है”
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अब किसी सरकार या बाहरी सहायता से उम्मीद नहीं रही। एक ग्रामीण ने कहा,
> “हमारे पास पहले खेत थे, अब सिर्फ भूख बची है। बच्चों को बचाने के लिए सूखी घास उबालकर खाना पड़ रहा है।”
🔹 दुनिया के लिए चेतावनी
यह कहानी सिर्फ एक देश की नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक चेतावनी है — जब राजनीति, सत्ता और युद्ध मानवता से ऊपर चले जाते हैं, तो नतीजा सिर्फ विनाश होता है।
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