एल्युमिनियम सप्लाई संकट गहराया, गोदामों का स्टॉक तीन साल के निचले स्तर पर; निर्माण और पैकेजिंग लागत बढ़ने की आशंका
दुनियाभर में एल्युमिनियम की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। उपलब्ध गोदाम स्टॉक में कमी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण एल्युमिनियम बाजार पर दबाव बढ़ा है। कम उपलब्धता के बीच उद्योगों में इस बात की चिंता है कि यदि सप्लाई पर दबाव लंबे समय तक बना रहा तो निर्माण, पैकेजिंग और अन्य एल्युमिनियम-आधारित उत्पादों की लागत बढ़ सकती है।
एल्युमिनियम की वैश्विक सप्लाई पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण क्षेत्र के कुछ प्रमुख एल्युमिनियम उत्पादन केंद्रों पर असर पड़ा है। इसके चलते कई खरीदार वैकल्पिक स्रोतों से धातु हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी बाजार में भी एल्युमिनियम की उपलब्धता को लेकर दबाव बना हुआ है।
लंदन मेटल एक्सचेंज यानी LME के गोदामों में एल्युमिनियम का स्टॉक भी काफी नीचे आ चुका है। अगस्त में उपलब्ध स्टॉक के कई वर्षों के निचले स्तर पर पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई थी, जो वैश्विक सप्लाई चेन में दबाव को दर्शाता है।
एल्युमिनियम की कमी का असर केवल धातु कारोबार तक सीमित नहीं रहता। इसका इस्तेमाल निर्माण क्षेत्र में खिड़की-दरवाजों, बिल्डिंग सिस्टम और अन्य संरचनात्मक उत्पादों में होता है। पैकेजिंग उद्योग में इसका उपयोग कैन, फॉयल और कई अन्य उत्पादों में किया जाता है। इसलिए कच्चे एल्युमिनियम की कीमत या उपलब्धता में बड़ा बदलाव इन उद्योगों की लागत को प्रभावित कर सकता है।
भारत में भी एल्युमिनियम की सप्लाई और कीमतों पर वैश्विक घटनाओं का असर पड़ सकता है। हाल की रिपोर्टों में पश्चिम एशिया के तनाव के कारण एल्युमिनियम कैन की उपलब्धता और लागत बढ़ने की बात सामने आई है। इसके चलते कुछ पेय कंपनियां पैकेजिंग के लिए एल्युमिनियम कैन के बजाय कांच और PET बोतलों की ओर भी रुख कर रही हैं।
दूसरी ओर, चीन दुनिया का सबसे बड़ा एल्युमिनियम उत्पादक बना हुआ है। चीन की घरेलू उत्पादन क्षमता पर सीमा होने के बावजूद आधुनिक तकनीक और बेहतर संचालन के कारण उत्पादन प्रभावी क्षमता के करीब बना हुआ है। चीनी कंपनियां भविष्य की क्षमता बढ़ाने के लिए इंडोनेशिया, कजाकिस्तान और अन्य देशों में भी नए एल्युमिनियम संयंत्रों में निवेश कर रही हैं।
बाजार विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि सप्लाई में मौजूदा दबाव कितने समय तक बना रहता है। यदि उत्पादन और परिवहन सामान्य नहीं होते और गोदामों का स्टॉक कम रहता है, तो एल्युमिनियम के प्रीमियम और कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इसका असर निर्माण सामग्री, पैकेजिंग और एल्युमिनियम का इस्तेमाल करने वाले अन्य उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर एल्युमिनियम उत्पाद की कीमत तुरंत बढ़ जाएगी। वास्तविक असर वैश्विक कीमतों, आयात लागत, घरेलू उपलब्धता, कंपनियों के स्टॉक और सप्लाई चेन की स्थिति पर निर्भर करेगा। फिलहाल कम गोदाम स्टॉक और वैश्विक सप्लाई में व्यवधान बाजार के लिए प्रमुख चिंता बने हुए हैं।
Poonam Report



