दिल्ली में इमारत गिरने की घटना के बाद आसपास चल रहे पेइंग गेस्ट यानी PG आवासों की व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सामने आई रिपोर्टों में बताया गया है कि कई जगह छात्रों और नौकरीपेशा युवाओं से ऊंचा किराया लिया जाता है, लेकिन रहने की सुविधाएं बेहद सीमित हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ PG में एक बिस्तर के लिए करीब ₹25,000 तक किराया लिया जा रहा है। इसके बावजूद कमरों में पर्याप्त जगह, खिड़कियां और अन्य जरूरी सुविधाएं नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ जगहों पर एक ही शौचालय का इस्तेमाल बड़ी संख्या में रहने वाले लोगों को करना पड़ता है।
हादसे के बाद PG और किराये के आवासों में भवन की सुरक्षा, अधिक लोगों को एक जगह रखने और नियमों के पालन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्टों में दिल्ली के कुछ PG में सीलन, खराब रखरखाव और अन्य असुविधाओं का भी उल्लेख किया गया है।
इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जिन इमारतों में बड़ी संख्या में छात्र और युवा रहते हैं, वहां सुरक्षा मानकों की नियमित जांच कितनी प्रभावी तरीके से हो रही है। खासकर संकरी गलियों और घनी आबादी वाले इलाकों में आपात स्थिति के दौरान बचाव और राहत कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
इमारत हादसे के बाद प्रशासन की कार्रवाई और PG व्यवस्था की निगरानी पर भी ध्यान बढ़ा है। दिल्ली में PG के संचालन, लाइसेंस और किराये से जुड़ी व्यवस्था को लेकर भी नए नियमों और निगरानी की चर्चा सामने आई है।
दिल्ली जैसे बड़े शहर में शिक्षा और रोजगार के लिए आने वाले हजारों युवा PG और हॉस्टल पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में सिर्फ किराया वसूलना ही नहीं, बल्कि भवन की मजबूती, पर्याप्त जगह, स्वच्छता, आपात निकास और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी जरूरी है। हादसे के बाद इन व्यवस्थाओं की जांच और जवाबदेही को लेकर मांग तेज होने की संभावना है।
Poonam Report



