कभी ‘डॉग फ्रूट’ कहलाता था एवोकाडो, अब बढ़ी मांग ने खोला किसानों के लिए नया बाजार

भारत में कभी एवोकाडो को खास महत्व नहीं मिलता था और कई जगह इसे पेड़ों पर पककर गिर जाने वाला फल माना जाता था। इसी वजह से इसे ‘डॉग फ्रूट’ भी कहा जाता था। लेकिन अब समय बदल गया है। शहरों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है और किसान पारंपरिक फसलों के विकल्प के तौर पर इसकी व्यावसायिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल करीब 15 हजार टन एवोकाडो का आयात होता है, जबकि देश में इसका घरेलू उत्पादन लगभग 8 से 9 हजार टन ही है। यानी मांग और घरेलू आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। कृषि क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक यही अंतर किसानों के लिए बाजार का अवसर पैदा कर रहा है।
एवोकाडो की बढ़ती लोकप्रियता का एक कारण इसके पोषण गुण भी हैं। इसमें फाइबर, पोटैशियम और फोलेट के साथ मोनोअनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है। इसी वजह से यह सलाद, सैंडविच और कई दूसरे खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने लगा है। बदलती खान-पान की आदतों और स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता ने भी इसकी मांग को बढ़ाया है।
किसानों के लिए फसल विविधीकरण का मुद्दा भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। कॉफी और काली मिर्च जैसी पारंपरिक फसलों पर मौसम और जलवायु में बदलाव का असर पड़ने की चिंता के बीच कुछ किसान वैकल्पिक फसलों की तलाश कर रहे हैं। एवोकाडो की व्यावसायिक खेती इसी बदलाव का एक उदाहरण बनकर सामने आई है।
केरल के वायनाड जैसे इलाकों में एवोकाडो की खेती को लेकर किसानों और बागान कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ी है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ उत्पादक अब बेहतर किस्मों और खेती की तकनीकों पर ध्यान दे रहे हैं, ताकि घरेलू बाजार की मांग को पूरा किया जा सके।
हालांकि एवोकाडो की बढ़ती मांग का मतलब यह नहीं है कि हर किसान के लिए इसकी खेती निश्चित रूप से लाभदायक होगी। उत्पादन के लिए उपयुक्त जलवायु, अच्छी पौध, बाजार तक पहुंच और फसल की गुणवत्ता जैसे कई कारक महत्वपूर्ण हैं। इसलिए किसानों के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञों और बाजार की जानकारी के आधार पर फसल का चुनाव करना जरूरी है।
फिलहाल भारत में मांग और घरेलू उत्पादन के बीच मौजूद अंतर यह संकेत देता है कि एवोकाडो आने वाले समय में देश के बागवानी क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण फसल बन सकता है। कभी कम उपयोग के कारण ‘डॉग फ्रूट’ कहलाने वाला यह फल अब किसानों के लिए पारंपरिक फसलों से अलग एक संभावित बाजार का रास्ता खोल रहा है।
Poonam Report



