तमिलनाडु: पूर्व मंत्री केएन नेहरू पर ₹1,020 करोड़ के कथित टेंडर मामले में FIR, पार्टी फंड के नाम पर वसूली का आरोप
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और डीएमके नेता केएन नेहरू के खिलाफ कथित ₹1,020 करोड़ के टेंडर मामले में विजिलेंस एवं एंटी-करप्शन निदेशालय (DVAC) ने एफआईआर दर्ज की है। मामले में नेहरू के अलावा उनके भाइयों और दो पूर्व डीएमके विधायकों समेत कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। एफआईआर में सरकारी टेंडरों में कथित हेरफेर और ठेकेदारों से रकम वसूलने के आरोप लगाए गए हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला 2021 से 2025 के बीच सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। DVAC की कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दी गई 258 पन्नों की रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुई जांच के बाद सामने आई है। एफआईआर में नेहरू पर अधिकारियों तक पहुंच और टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है।
जांच में आरोप लगाया गया है कि कुछ ठेकेदारों को सरकारी काम दिलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर बदलाव किए गए। रिपोर्टों के अनुसार, ठेकों की रकम का एक हिस्सा कथित रूप से ‘पार्टी फंड’ के नाम पर वसूले जाने का आरोप है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच का हिस्सा हैं और अदालत में अभी साबित नहीं हुए हैं।
इस मामले से पहले 5 सितंबर को DVAC ने केएन नेहरू, उनके भाई रविचंद्रन और अन्य संबंधित लोगों से जुड़े करीब 30 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। तमिलनाडु के कई जिलों में हुई इस कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने 241 दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए थे।
मामले में केएन नेहरू ने अपने खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक दबाव बताया है और आरोपों से इनकार किया है। डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने भी DVAC की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। दूसरी ओर, जांच एजेंसी मामले में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।
अब जांच का मुख्य फोकस टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर, ठेकेदारों से धन वसूली और सरकारी अधिकारियों की भूमिका से जुड़े आरोपों पर है। एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले में आगे की जांच और साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Poonam Report



