
उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल क्षेत्र में सड़क सुविधा की कमी का गंभीर मामला सामने आया है। पिनाऊं गांव के लिए करीब 11 साल पहले सड़क स्वीकृत होने के बावजूद अब तक निर्माण पूरा नहीं हो सका है। बुधवार को गांव की आंगनबाड़ी कार्यकत्री खिमुली देवी को अचानक प्रसव पीड़ा होने पर ग्रामीणों को उन्हें डंडी के सहारे पैदल अस्पताल की ओर ले जाना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, पिनाऊं गांव के लिए वर्ष 2015 में 23 किलोमीटर लंबी धुराधारकोट-वांक-पिनाऊं सड़क को स्वीकृति मिली थी। लेकिन स्वीकृति के 11 साल बाद भी सड़क गांव तक नहीं पहुंच पाई। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को आज भी पैदल रास्तों और स्थानीय साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
बुधवार सुबह करीब 11 बजे खिमुली देवी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव में सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें डंडी के सहारे करीब छह किलोमीटर तक पैदल पहुंचाया। रास्ता भी क्षतिग्रस्त था, इसलिए ग्रामीणों को मुश्किल परिस्थितियों में रास्ता बनाते हुए उन्हें पाटिंगधार तक ले जाना पड़ा।
ग्राम प्रधान लखपत दानू के मुताबिक, ग्रामीण पाटिंगधार में हेलीकॉप्टर का इंतजार करते रहे। शाम करीब साढ़े पांच बजे तक इंतजार के बाद भी हेलीकॉप्टर नहीं पहुंचा। इसके बाद महिला को सड़क मार्ग से कालीताल ले जाया गया और रात करीब साढ़े नौ बजे देवाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। वहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने पर एंबुलेंस से उन्हें जिला अस्पताल बागेश्वर भेजा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को आए दिन डंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। उनका आरोप है कि गांव के लिए सड़क निर्माण की घोषणा और स्वीकृति के बावजूद वर्षों से समस्या बनी हुई है।
लोक निर्माण विभाग के थराली खंड के अधिशासी अभियंता मनीष डोगरा के अनुसार, स्वीकृत सड़क के रास्ते में बड़ी संख्या में वन क्षेत्र के पेड़ हैं और वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि लोहाजंग से वांक गांव तक सड़क बन चुकी है और ग्रामीणों की सहमति होने पर वांक से पिनाऊं तक सड़क का विकल्प भी देखा जा सकता है।
पिनाऊं गांव की यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की आपसी जरूरत को सामने लाती है। ग्रामीणों के लिए सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आपात स्थिति में अस्पताल और जरूरी सेवाओं तक समय पर पहुंचने का महत्वपूर्ण माध्यम है। अब ग्रामीणों की उम्मीद है कि सड़क निर्माण की वर्षों पुरानी समस्या का जल्द समाधान होगा।
Poonam Report



